फ़िरोज़ सिद्धार्थी
मेरे मौला तू दुनियां का रहमान है
ज़र्रे ज़र्रे पे तेरा ही एहसान है
एै खुदा तेरी रहमत बरसती रहे
सारे आलम का तूही निगहबान है
तेरी मखलूक हैं इस जहां में सभी
सबकाे पैदा किया ये तेरी शान है
मेरे मौला तू दुनियाँ का रहमान है
ज़र्रे ज़र्रे पे तेरा ही एहसान है
तू ही है मालिके ख़ालिके दो जहाँ
सारे इंसान का इस पे ईमान है
भेद हरइक के दिल का तूही जानता
आलमुलग़ैब है तू न अनजान है
मेरे मौला तू दुनियाँ का रहमान है
ज़र्रे ज़र्रे पे तेरा ही एहसान है
चाँद तारे जमीं आसमाँ और सब
तेरी कुदरत पे दुनियाँ ये हैरान है
शुक्रिया मेरे मौला तेरा शुक्रिया
सबसे अशरफ जहाँ में जो इंसान हैं
मेरे मौला तू दुनियां का रहमान है
ज़र्रे ज़र्रे पे तेरा ही एहसान है
ऐ खुदा तेरी रहमत बरसती रहे
सारे आलम का तू ही निगहबान है
फ़िरोज़ सिद्धार्थी
